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Tuesday, February 3, 2009

What is a Lease Agrement and its Usefulness : क्या होता है लीज अग्रीमेंट और क्या हैं इसके फायदे

किराए पर मकान लेने की बात सुनने में तो आसान लगती है, लेकिन इसकी प्रक्रिया में ऐसी कुछ कठिनाइयां आ सकती हैं,

जिसका ध्यान रखना बेहद जरूरी है। किसी भी मकान को किराए पर लेने से पहले किराएदार को मूल बातों का ठीक से पता कर लेना चाहिए। मकान किराए पर लेने का मन बन जाने पर सभी दस्तावेज सॉलिसिटर से सत्यापित करा लेना बेहतर रहता है। इससे आप बाद की मुश्किलों से बच सकते हैं। किराए से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और मुद्दे इस प्रकार हैं :

  • किराएदार को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि मकान मालिक के पास प्रॉपटी का मालिकाना हक हो।
  • उसे यह डिक्लेरेशन ले लेना चाहिए कि मकान से संबंधित कोई कानूनी मामला नहीं चल रहा।
  • ससायटी के शेयर सर्टिफिकट की जांच करा लेनी चाहिए। यह जरूरी है क्योंकि अधिकतर मामलों में किराएदार को सिक्यूरिटी डिपॉजिट देना पड़ता है।
  • मकान को किराए पर देने की ससाइटी से अनुमति। किराएदार को उन नियमों और शर्तो को समझ लेना चाहिए जिसके तहत अनुमति दी गई है।
  • यह सुनिश्चित कर लीजिए कि पहले के सभी टेलिफोन और बिजली बिलों का भुगतान कर दिया गया है।
  • समझौते पर स्वयं मकान मालिक या उसके द्वारा अधिकृत पावर ऑफ अटर्नी के हस्ताक्षर होने चाहिए।
  • लीज अग्रीमंट में क्या जरूरी

लीज अग्रीमंट ठीक तरह से लिखा होना चाहिए। खास तौर से उसमें नीचे दिए जा रहे बिंदू शामिल होने जरूरी हैं-

  • किराया बढ़ाने संबंधी शर्त- किराया कब और कितना बढ़ाया जाएगा।
  • किराए में शामिल की गई सभी सुविधाओं का ब्यौरा।
  • ससायटी को दिया जाने वाला मेंटेनेंस चार्ज। क्या यह किराए में शामिल है? इसका भुगतान कौन करेगा।
  • घर में होने वाली नियमित मरम्मत और मेंटेनेंस का खर्च कौन वहन करेगा।
  • फिक्सचर और फिटिंग के कार्य मकान मालिक कराएगा या किराएदार।
  • समझौता रद्द करने का आधार। किसी पक्ष द्वारा सूचना देने की मियाद।
  • यदि लीज डीड का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है, तो रजिस्ट्रेशन पर आने वाला खर्च कौन उठाएगा।
  • लीज का नवीनीकरण।
  • सिक्यूरिटी डिपॉजिट और अडवांस्ड रेंट। क्या सिक्यूरिटी डिपॉजिट पर ब्याज लगेगा? आमतौर पर यह नहीं लगता है।
  • पार्किंग एरिया
  • ससायटी में प्रवेश करने का शुल्क (कुछ ससायटी शुल्क वसूलती हैं।)
  • किराएदार को दिया गया कॉमन एरिया, गार्डन और टेरेस राइट
  • म्यूनिसिपल ड्यूज और प्रॉपर्टी टैक्स

ये मुद्दे बड़े शहरों में काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं, क्योंकि दूसरे शहरों की तुलना में इनमें किराया अधिक होता है। दूसरे, यहां 10-15 महीने तक के किराए जितनी रकम सिक्यूरिटी डिपॉजिट के रूप में देनी होती है। इसका मतलब है लीज की पूरी अवधि का किराया यहां अडवांस में ही ले लिया जाता है। इन मुद्दों का ध्यान रखने से किराएदार भविष्य की कई समस्याओं से बच सकते हैं।

लंबे समय में फायदा देते हैं इक्विटी और प्रॉपर्टी

बाजार के मौजूदा हाल को देखते हुए भले ही इस समय 'लंबी अवधि' की सलाह निवेशकों को ज्यादा पसंद नहीं आएगी लेकिन ऐसे दौर में लंबे समय का निवेश ही अच्छा रहता है। चाहे शेयर हों या म्यूचुअल फंड, निवेशकों को बाजार की किसी भी स्थिति में अच्छा रिटर्न कमाने के लिए 3-5 वर्ष का नजरिया रखना चाहिए। बाजार में अस्थिरता के मद्देनजर यह अवधि अब और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इक्विटी ही एकमात्र विकल्प नहीं है। प्रॉपर्टी भी संपत्ति का एक ऐसा वर्ग है, जो न केवल लंबी अवधि में अच्छा मुनाफा देता है बल्कि तेजी का दौर आने पर लघु अवधि में भी इससे अच्छा रिटर्न कमाया जा सकता है। लेकिन इक्विटी से अलग इसमें तरलता ज्यादा नहीं होती। खासकर मंदी के समय में इस निवेश से बाहर निकलना काफी मुश्किल हो जाता है। चाहे इक्विटी हो या प्रॉपर्टी दोनों में लंबी अवधि में जोखिम कम हो जाता है और ये अधिक समय के लिए निवेश करने वालों के लिए अच्छे विकल्प हैं।

ऐसे निवेश के लिए सही प्रोडक्ट के चुनाव के साथ ही इन बातों पर भी ध्यान देना चाहिए:

व्यवस्थित निवेश
लंबी अवधि के निवेश की योजना का यह मूल सिद्धांत है। इक्विटी निवेशकों के लिए यह और भी जरूरी है क्योंकि इसमें अस्थिरता काफी अधिक होती है। तेजी के दौरान एकमुश्त निवेश सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) की तुलना में अच्छा रिटर्न दे सकता है लेकिन लंबे समय में जोखिम को कम करने और रिटर्न को बढ़ाने के लिए एसआईपी अच्छा रहता है। लेकिन यह तरीका प्रॉपर्टी में कारगर नहीं है क्योंकि आप प्रॉपर्टी में व्यवस्थित निवेश नहीं कर सकते।

डायवर्सिफिकेशन
कोई भी अकेला प्रोडक्ट आपकी संपत्ति में इजाफे के लिए पर्याप्त नहीं होता क्योंकि समय के साथ ही आपकी जोखिम उठाने की क्षमता और जरूरतें भी बदलती रहती हैं। इसे देखते हुए डायवर्सिफिकेशन बहुत जरूरी है। इससे आप जोखिम का बेहतर प्रबंधन भी कर सकते हैं। कुछ प्रोडक्ट्स का बास्केट चुनने के साथ ही इनमें संपत्ति के आवंटन की भी समय-समय पर समीक्षा करना न भूलें।

पोर्टफोलियो में बदलाव
बहुत से निवेशक अपने चुनिंदा शेयरों या निवेश के प्रोडक्ट्स से भावनात्मक लगाव रखने लगते हैं, जो ठीक नहीं है। अधिकतम रिटर्न हासिल करने के लिए नियमित अंतराल पर खरीदारी और बिकवाली करना जरूरी होता है। किसी प्रोडक्ट को हमेशा के लिए न त्यागें और न ही उससे पूरी जिंदगी अपने साथ बांधे रखें। उदाहरण के तौर पर बाजार की मौजूदा स्थिति में एक वर्ष पहले निवेश की शुरुआत करने वाले लोगों को नुकसान कम करने के लिए बिकवाली करने पर मजबूर होना पड़ सकता है। ऐसे लोगों को इक्विटी से मुंह नहीं फेरना चाहिए। बाजार सुधरने पर अपनी वित्तीय जरूरतों और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार फिर से निवेश किया जा सकता है।