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Wednesday, February 4, 2009

Be in Sun Light your eyes will be fine : थोड़ा धूप में रहो, नजर ठीक रहेगी

रोज कुछ वक्त धूप में बिताना खासा फायदेमंद है। बच्चों के लिए यह और भी अहम है। इससे वे आंखों में होने वाली किसी प्रॉब्लम से बच सकते हैं। 


ऑस्ट्रेलियाई रिसर्च काउंसिल स्टडी के मुताबिक, हर दिन धूप में 2-3 घंटे बिताने से पास की चीजों को देखने में होने वाली दिक्कत में सुधार होता है। पारंपरिक रूप से यह प्रॉब्लम ज्यादा पढ़ाई-लिखाई करने वालों को होती है। 


हॉन्गकॉन्ग, ताइवान, जापान, कोरिया और चीन के वैसे बच्चे स्कूल छोड़े जाने तक चश्मे पहनने के आदी हो चुके थे, जो धूप में कम वक्त बिताते थे। इन देशों में ऐसे बच्चों की तादाद ऑस्ट्रेलियाई बच्चों के मुकाबले कहीं ज्यादा थी। पता चला कि वजह कमरों से बाहर मैदान या धूप में बिताना था।


इस काउंसिल के प्रोफेसर इयान मॉर्गन के मुताबिक, पढ़ाई के बोझ के चलते बच्चों का ज्यादा वक्त किताबों में ही डूबता है और वे धूप में कम ही निकल पाते हैं। इस कारण उनकी नजर कमजोर हो जाती है। 

Stay Protected with Pest Control : पेस्ट कंट्रोल से घर रहे सुरक्षित

घर चाहे कितना भी सुंदर और फर्नीचर कितना ही महंगा क्यों हो, कीड़े-मकोड़े उन्हें खराब करने से पहले सोचेंगे नहीं। लिहाजा, आपको पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर की सर्विस लेने में हिचकना नहीं चाहिए। 


घर में कराया गया पेस्ट कंट्रोल ट्रीटमेंट आमतौर पर एक महीने तक प्रभावी रहता है। वैसे, पेस्ट कंट्रोल के लिए प्रफेशनल हेल्प ली जानी चाहिए या नहीं, यह इस बात पर डिपेंड करता है कि घर में कीड़े-मकोड़ों की हालत क्या है? हालांकि नए बने मकान में तो प्रफेशनल हेल्प लेना सही रहता है, जिससे आगे चलकर कोई दिक्कत हो। 


अगर किचन में एक-दो कॉकरोच दिखाई दें, तो किसी प्रफेशनल की मदद लेने की जरूरत अभी नहीं आई है। स्प्रे से ही काम चल सकता है। आमतौर पर जैनुइन पेस्ट कंट्रोल एजेंसी इंडियन पेस्ट कंट्रोल एसोसिएशन की सदस्य होती हैं, जो पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर्स से जुड़े मामलों को देखती है। 


घर के फर्नीचर और फर्निशिन्ग की मेंटेनेंस भी आपके इस अभियान का हिस्सा होना चाहिए। लकड़ी के बने मेज-कुर्सियों समेत सारे फर्नीचर पर एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट कराएं। 


केमिकल हर हाल में नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए पेस्ट कंट्रोल कराने से पहले एजेंसी से ट्रीटमेंट के बारे में अच्छी तरह समझ लें। ट्रीटमेंट में इस्तेमाल मटीरियल और उसके साइड इफेक्ट्स के बारे में बेहिचक पूछें। यह सुनिश्चित करें कि किसी एक्सपायर्ड केमिकल का प्रयोग हो और उनकी बोतलों पर लेबलिंग पूरी हो। 


साथ ही उन्हें घरों में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया हो, कि इंडस्ट्री के प्रयोग के लिए। एक अच्छा पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर हर केमिकल के बारे में छोटी से छोटी बात बता सकता है और उसे यह भी बता होता है कि फलां केमिकल ही क्यों इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

 

Home Clean in minutes : मिनटों में घर हो जाए चकाचक


अचानक मेहमानों के घर आने पर बिखरा गंदा घर आपके लिए शर्मनाक स्थिति पैदा कर देगा। अगर आपके सामने भी 

 

ऐसी कोई सिचुएशन जाए, तो इन टिप्स को आजमाएं- 


आप अपनी क्लिनिंग किट हमेशा एक जगह पर रखें। इससे घर को जल्दबाजी में साफ करने की नौबत आने पर इन्हें ढूंढने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। 


हर चीज के लिए जगह सुनिश्चित करें। जैसे चेअर, टेबल और टीवी हमेशा एक ही जगह पर हों। इससे आपको हर जगह साफ करने में सुविधा होगी और आप कोई भी कोना साफ करने से नहीं चूकेंगी। 


हर हिस्से की सफाई के लिए अलग टूल्स का इस्तेमाल करें। जैसे खिड़कियों की डस्ट साफ करने वाले कपड़े से पोंछा लगाएं। फर्श पर लगे धब्बों को रगड़ने के बजाय उन्हें वाइप से हटाएं। 


अक्सर आप सफाई करते समय वैक्यूम क्लीनर को हर कमरे में लगाकर फिर सफाई करती होंगी। इस झंझट से बचने के लिए वैक्यूम क्लीनर को एक निश्चित स्विच बोर्ड पर लगाएं। क्लीनर की तार इतनी लंबी होनी चाहिए कि वह हर कमरे में आसानी से पहुंच सके। इससे आपको हर कमरे में वैक्यूम क्लीनर नहीं लगाना पड़ेगा। 


किचन में रखे डब्बों या बोर्ड के ऊपर की डस्ट को साफ करने में समय बर्बाद करें। अगर आप वह काम करने लग गई, तो आपका सारा समय उन्हीं की सफाई में निकल जाएगा। सफाई करने के बाद यह चेक करना भूलें कि सभी सामान अपनी जगह पर है। आप सामान को उनकी जगह पर रखने का नियम बना लें और सभी चीजों की जगह सुनिश्चित कर लें जैसे न्यूजपेपर और मैगजीन टेबल के नीचे रखे जाएंगे, सीडी डीवीडी अलमारी में होंगे। अगर आप रेग्युलर इन जगहों की डस्टिंग करेंगी, तो मेहमानों के अचानक आने पर आपको हड़बड़ाहट नहीं होगी।

Do you opened a Junior Account for your Child : जूनियर का एकाउंट बनाया?

अगर आप उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने 18 साल पूरे करने के बाद कॉलेज के लिए घर से बाहर कदम रखते वक्त बैंक खाता शुरू किया था और अपनी प्रतिष्ठा बचाना चाहते हैं तो अपने से कम उम्र के बच्चे को यह जानकारी ही दीजिए। ऐसा करने पर आपको बच्चे के अजीबोगरीब हाव-भाव का सामना करना पड़ेगा, जो आप पर तंज कसते हुए बताएगा कि वह 10 साल की उम्र में ही बैंकिंग से रूबरू हो गया था। तो क्या करना चाहिए आपको?

 

क्यों जरुरी है किड-एकाउंट?

इन दिनों बच्चे जल्दी बड़े हो रहे हैं। वे अपना बैंक खाता चाहते हैं, पैसा निकालने के लिए एटीएम कार्ड इस्तेमाल करना चाहते हैं और शॉपिंग करते वक्त खुद डेबिट कार्ड का उपयोग करना चाहते हैं। भारत में ज्यादातर बैंक बच्चे के नाम पर बचत खाता शुरू करने की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। आइए हम आपको इस बारे में इंफॉरमेंशन दें कि ऐसा कैसे किया जा सकता है और इसके क्या क्या लाभ हैं...

 

जानिए बेसिक बातें

अधिकतर बैंकों में जूनियर एकाउंट 18 साल के बच्चों के लिए उपलब्ध हैं। हालांकि ऐसा खाता शुरू करने के लिए न्यूनतम आयु एक दिन भी हो सकती है। आगे कोई भी जानकारी देने से पहले यह साफ करना बेहतर रहेगा कि भले ही खाता बच्चे के नाम पर हो, लेकिन इसका संचालन माता-पिता या कानूनी रूप से मान्य अभिभावक की अगुवाई में हो सकता है। अभिभावक को नियमित अंतराल पर कुछ रकम इस खाते में डालने को कहा जा सकता है और बच्चे भी अपनी बचत इसी खाते में जमा करा सकते हैं। इस खाते में न्यूनतम राशि रखने को भी कहा जा सकता है और यह बैंक पर निर्भर करता है।

 

फायदे ही फायदे

खाता शुरू करने का उद्देश्य अपने बच्चे के लिए पैसे के स्रोत का इंतजाम करना और उसे अच्छा महसूस कराना ही नहीं है। अनुशासन का बोध कराने की, खास तौर से एटीएम और डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को लेकर। 


एचडीएफसी बैंक में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रीटेल लायबिलिटीज अनिंदया मित्रा ने कहा, ' पॉकेट मनी, तोहफे, स्कॉलरशिप आदि विभिन्न स्रोत से मिलने वाले अतिरिक्त पैसे को बैंक खाते में जमा करने से बच्चे को बचत और बजटिंग की आदत पड़ती है।'

 

पैरेंट्स का कंट्रोल

अभिभावक पैसे और कार्ड के दुरुपयोग को लेकर चिंतित हो, इसमें मदद देने के लिए बैंक बच्चों के खातों पर मां-बाप के नियंत्रण की सहूलियत देते हैं। यह अभिभावक पर निर्भर करता है कि वह एटीएम या डेबिट कार्ड जारी कराना चाहता है या नहीं। साथ ही चेक से भुगतान करते वक्त उस पर अभिभावक के दस्तखत जरूरी होते हैं। ऑनलाइन या फोन बैंकिंग से होने वाली ट्रांजैक्शन के लिए जरूरी पासवर्ड भी अभिभावकों को दिए जाते हैं और उन्हें बच्चों को यह जानकारी नहीं देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। 


आईसीआईसीआई बैंक के वरिष्ठ महाप्रबंधक मनिंदर जुनेजा ने कहा, ' यहां तक कि जब ऐसे कार्ड जारी किए जाते हैं तो भी बैंक अभिभावकों को रकम की वह सीमा तय करने की इजाजत देते हैं जो एटीएम से निकाली जा सकती है या फिर डेबिट कार्ड इस्तेमाल करते वक्त खर्च की जा सकती है।'

 

और क्या हैं लाभ?

बच्चों के खाते पर कुछ बैंक आपको खास सुविधाएं देते हैं। एचडीएफसी किड्स एडवांटेज प्लान सड़क हादसे में अभिभावक की मृत्यु होने की सूरत में करीब एक लाख रुपए का मुफ्त शिक्षा बीमा कवर मुहैया कराता है। इसके अलावा अगर खाते में जमा राशि किसी खास स्तर को पार करती है तो बैंक खुद--खुद उसका कुछ हिस्सा फिक्स्ड या टर्म डिपॉजिट में स्थानांतरित कर देता है। 


कदम-दर-कदम ऐसा खाता शुरू करने के लिए आपको बच्चे के पैदा होने की तारीख की पुष्टि करने वाले दस्तावेज की जरूरत होती है। अभिभावक को बालक की पहचान, पता और बच्चे के साथ अपने रिश्ते साबित करने से जुडे़ कागजात भी जमा कराने होते हैं। रकम के आधार पर ऐसी स्थिति तय की गई है, जब बच्चा अकेले अपना खाता चला सकता है लेकिन उम्र और ट्रांजैक्शन का तरीका बैंक पर निर्भर करता है।