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Monday, January 26, 2009

एलआईसी ने ये बात तो छिपा ही ली

भारतीय जीवन बीमा निगम की जीवन आस्था योजना को मिली भारी प्रतिक्रिया को किस तरह लिया जाए? क्या यह एक बेहतरीन उत्पाद तैयार करने के लिए एलआईसी को ग्राहकों द्वारा दिया गया 8000 करोड़ रुपए से ज्यादा का उपहार है ? या फिर कुछ चालाकी से और कम पारदर्शिता से बेची गई एक स्कीम का नतीजा? हमारा जवाब दोनों में ही है। एलआईसी ने निश्चित तौर पर एक ऐसा उत्पाद बनाया जो अनिश्चित दौर के लिए सबसे उपयुक्त है और बाजार की नब्ज पकड़ता है- एक ऐसा उत्पाद जो निश्चित रिटर्न का वादा करता है। इसके बावजूद एलआईसी की भारी कामयाबी इस वजह से भी रही कि उसने इस योजना के लाभ के बारे में उतनी पारदर्शिता नहीं बरती है, जितनी उससे उम्मीद की जाती है।

 

दुर्भाग्य ही कहेंगे कि बीमा रेगुलेटर इरडा ने भी ठीक अपनी नाक के नीचे हुई इस योजना की भारी-भरकम खरीद के प्रति अपनी आंखें बंद रखीं। सतह पर देखें तो जीवन आस्था एक सिंगल प्रीमियम अश्योरेंस योजना है जिसमें परिपक्वता या मौत पर लाभ की गारंटी दी गई है। एक ऐसे माहौल में जहां बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें घटा दी हों, ऐसा लगता है कि यह योजना दोनों ही जरूरतों को पूरी करती थी- एफडी के मुकाबले बेहतर करमुक्त रिटर्न और साथ में बीमा कवर। इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि इसे इतनी भारी प्रतिक्रिया क्यों मिली, हालांकि सतर्क तरीके से गणना की जाए तो सालाना रिटर्न अधिकतर मामलों में 6.75 फीसदी से 7.25 फीसदी के बीच बैठता है!

 

हमने हमेशा निवेशकों के तईं ज्यादा फाइनांशियल लिटरेसी और कंपनियों के स्तर पर अधिक ट्रांसपेरेंसी की वकालत की है। इसके बावजूद इसमें शक पैदा होता है कि ठीक-ठाक जानकारी रखने वाले निवेशक भी आखिर क्यों नहीं उस परदे के पीछे झांक सके, जिस पर एलआईसी ने लाभ की मुहर लगा रखी थी। मसलन, यदि किसी बीमा योजना पर देय प्रीमियम तय राशि के 20 परसेंट से ज्यादा होता है, तो बीमा की प्रक्रिया करारोपण के योग्य हो जाती है। जीवन आस्था के मामले में एकल प्रीमियम मेच्योरिटी राशि से कई मामलों में 20 परसेंट से ज्यादा बैठता है और इस तरह मेच्योरिटी राशि पर टैक्स लगना लाजिमी हो जाता है। एलआईसी ने यही बात छुपाए रखी। यह समय की दरकार है कि बाजार के खिलाड़ी निवेशकों के साथ चूहा-बिल्ली की दौड़ खेल कर पैसे बनाना छोड़ें। यदि ऐसा नहीं होता है, तो नियामक संस्थाओं को तत्काल दखल देना चाहिए और उन्हें ऐसा करने को बाध्य करना चाहिए।

 

 

Pension Plan : पेंशन प्लान के लिए भविष्य की जरूरतों का अनुमान जरूरी

पिछले कुछ समय से वित्तीय बाजारों पर अनिश्चितता केबादल घिरने की वजह से दौराननिवेशकों के बीच रिटायरमेंट कीयोजना तैयार करने की जरूरतको तरजीह दी जाने लगी है।हाई वोल्टेज मार्केटिंगरणनीतियों ने कई तरह से इसमें भूमिका अदा की है लेकिन जीवनकालबढ़ने और नौकरी एवं कॅरियर के मोर्चे पर लगातार बढ़ती अनिश्चिय कीस्थिति की वजह से लोग पेंशन प्लान के बारे में सोचने पर मजबूर हो गए हैं।

 

इसके फलस्वरूप पेंशन प्लान निवेश पर अब केवल कर छूट का फायदाउठाने के लिए गौर नहीं किया जाता बल्कि लोग संजीदा होकर पेंशन सेहोने वाली आमदनी के बारे में सोचने लगे हैं। वेतनभोगी लोगों के पासरिटायर होने के बाद ग्रेच्युटी और पेंशन इनकम का सहारा होता हैलेकिन जो व्यक्ति स्वरोजगार में लगे लोगों के पास केवल पेंशन प्लानका ही सहारा होता है। इससे रिटायरमेंट की बाद की जिंदगी के लिएउनके पास नियमित आय का स्रोत बरकरार रहता है।

 

हालांकि पेंशन प्लान निवेशकों के दोनो समूहों के लिए फायदेमंद हैक्योंकि यह सामान्य निवेश उत्पाद है जिसमें बहुत कम प्रबंधन कीजरूरत पड़ती है। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि यह उत्पाद कामकैसे करता है तो जरा इस ब्योरे पर नजर डालिए :

 

पेंशन प्लान बीमा कंपनियां मुहैया कराती हैं और कुछ म्यूचुअल फंडइसकी पेशकश करते हैं। पेंशन रोजगार से सेवानिवृत्ति के बाद मिलती हैलेकिन निवेशक अपने मन - मुताबिक अवधि तय कर सकता है। मसलन, 50 वर्षीय एक पेशेवर 10 साल की टर्म के लिए पेंशन प्लानले सकता है लेकिन अगर उसे लगता है कि उसे फिलहाल पेंशन सेमिलने वाले पैसे की जरूरत नहीं है तो वह यह अवधि पांच और साल के लिए बढ़ा सकता है।

 

सौभाग्य से आप ऐसा फैसला पेंशन प्लान लेते वक्त ही नहीं बल्कि 60के करीब पहुंचने पर भी कर सकते हैं। इसलिए , युवा निवेशकों के पासपेंशन के लिए ज्यादा रकम एकत्र करने का विकल्प होता है जबकि जोइस बारे में देर से सोचते हैं, उनके हाथ में कम वक्त होता है।

 

कई लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती पेंशन प्लान के लिए प्रीमियम तयकरना होता है। तकनीकी रूप से, पेंशन फंड को रिटायरमेंट कीबाद की जिंदगी के लिए पैसे काइंतजाम सुनिश्चित करनाचाहिए। हालांकि , जीवन केशुरुआती चरण में आंकड़ें तयकरना इतना आसान नहीं होताक्योंकि थोड़े वक्त में ही हमारीजरूरतों और जीवनशैली मेंगजब का बदलाव आ जाता है।

 

इसलिए , दिमाग में यह बात रखना जरूरी है कि एक पेंशन प्लान सेशायद आपकी जरूरतें पूरी न हों और आपको ऐसी एक और स्कीमलेनी पड़े। एक से ज्यादा पेंशन प्लान का विकल्प है पति और पत्नी केलिए अलग - अलग पेंशन प्लान जो लंबी अवधि में कर छूट का फायदा भी मुहैया कराता है।

 

सेवानिवृत्ति के बाद कितनी पेंशन की जरूरत होगी , इसका अंदाजा लगाने का सबसे आसान तरीका मौजूदा जरूरतों के आधार पर रकम कापता लगाना है। मासिक खर्च का ब्यौरा तैयार करते वक्त बच्चे की शिक्षाजैसे व्यय को इसके दायरे से बाहर ही रखिए क्योंकि रिटायरमेंट के बादऐसा खर्च आपको नहीं चुकाना होगा।

 

पेंशन को भविष्य की वैल्यू के आधार पर मासिक खर्च के कम से कम 50 फीसदी हिस्से का ख्याल रखना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर किसी 35 वर्षीय निवेशक का मासिक खर्च 50,000 रुपए है तो उसे इसरकम की भावी वैल्यू तक पहुंचना चाहिए और फिर पेंशन की रकम परगौर करना चाहिए। रिटायरमेंट या पेंशन की रकम का आकलन करते वक्त लिक्विड फंडऔर सावधि जमा जैसे वित्तीयसंपत्तियों पर गौर करना चाहिए।

 

प्रॉपर्टी और किराए से होने वालीआमदनी पर भी विचार करनाचाहिए। हालांकि निवेशकों कोखर्च का अंदाजा लगाते वक्तमहंगाई दर के मामले में खुलारुख दिखाना चाहिए और इसकाआकलन कम से कम 8-9 फीसदी की दर से किया जाना चाहिए।

 

थोक मुद्रास्फीति दर औसतन पांच फीसदी के आसपास रहती है लेकिनजब बात स्वास्थ्य सेवा जैसे खर्च की आती है तो यह काफी ज्यादाहोता है। पेंशन प्लान का प्रीमियम आपकी उम्र और पेंशन की रकम परनिर्भर करता है। अगर कम उम्र में आप इसमें निवेश करते हैं तो कमप्रीमियम पर अधिक पेंशन का लाभ उठा सकते हैं। उम्र बढ़ने परप्रीमियम की रकम भी बढ़ जाती है।

 

पेंशन की शुरुआत का समय आप स्वयं तय कर सकते हैं। अगर आपप्राइवेट सेक्टर में नौकरी करते हैं जहां पेंशन की सुविधा नहीं है तोअपने जीवन के सुनहरी वर्षों में वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिएआप पेंशन प्लान में निवेश कर सकते हैं।


Source: ET Hindi

Save Tax on Medical Insurance : मेडिकल इंश्योरेंस पर ले सकते हैं टैक्स का लाभ

सालाना आमदनी पर कर बचाने के लिए एक लाख रुपए की बचत की सीमा के बारे में सभी जानते हैं।लेकिन बहुत कम लोगों को इसबात की जानकारी है कि करबचाने के लिए आयकर कानूनकी धारा 80 डी का भी इस्तेमालकिया जा सकता है। 

विकास ने अपने पूरे परिवार केलिए मेडिकल इंश्योरेंस ली है।वह प्रतिवर्ष खुद के लिए 9,000 रुपए और अपनी पत्नी के लिए 8,000रुपए प्रीमियम का भुगतान करते हैं। इसके अलावा वह अपने पिता केलिए 7,000 रुपए और चाचा के स्वास्थ्य बीमा के लिए 6,000 रुपएसालाना का प्रीमियम भरते हैं। क्या वह इस पर कर कटौती का लाभ लेसकते हैं 

मेडिकल इंश्योरेंस आप खुद के साथ साथ अपने परिवार के लिए भीले सकते हैं और धारा 80 डी के तहत प्रीमियम की राशि आय में सेकटौती के योग्य होती है। यह कटौती प्रीमियम की राशि या 15,000रुपए जो भी कम हो के लिए मिलती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यहप्रीमियम की राशि या 20,000 रुपए जो भी कम हो है। कटौती उसीस्थिति में उपलब्ध होती है जब प्रीमियम का भुगतान चेक या क्रेडिटकार्ड के जरिए किया जाए। नकद भुगतान पर यह लाभ नहीं मिलता। 

करदाता खुद के लिए पति या पत्नी के लिए आश्रित माता पिता याआश्रित बच्चों के लिए ली जाने वाली मेडिकल इंश्योरेंस पर ही कर लाभले सकता है। इसके लिए भी जरूरी है कि उस मेडिकल इंश्योरेंस स्कीमको जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन या बीमा नियामक एवं विकासप्राधिकरण इरडा से मंजूरी प्राप्त हो। अगर आप अपने परिवार के साथही 65 वर्ष से अधिक आयु वाले माता पिता के लिए इंश्योरेंस लेते हैंतो आप इस पर 35,000 रुपए तक की कर कटौती ले सकते हैं। 
विकास के मामले में कर कटौती इस प्रकार होगी 

खुद के बीमा के लिए प्रीमियम का भुगतान 000 रुपए 

पत्नी के लिए प्रीमियम का भुगतान 000 रुपए 

कुल प्रीमियम 000 रुपए जमा 8,000 रुपए ): 17 000 रुपए। 

नियम के अनुसार विकास बीमा के प्रीमियम की राशि या 15,000 रुपएमें से जो भी कम राशि हो उस पर कर कटौती ले सकते हैं। विकासके लिए यह राशि 15,000 रुपए की होगी। विकास अपने पिता कीमेडिकल इंश्योरेंस के लिए 7,000 रुपए के प्रीमियम पर भी कर कटौतीका लाभ ले सकते हैं। इस तरह उनकी कुल कटौती 15 000 रुपएजमा 7,000 रुपए 22 000 रुपए की होगी। विकास ने अपने चाचा केबीमा के लिए जिस प्रीमियम का भुगतान किया है उस पर उन्हें कोईकर लाभ नहीं मिलेगा। 

अगर पति और पत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं तो वे हेल्थ इंश्योरेंस के वार्षिकप्रीमियम पर अलग अलग 15,000 रुपए तक की कर कटौती ले सकतेहैं। अगर दोनों मिलकर 20,000 रुपए का प्रीमियम भरते हैं तो उनमें सेएक 15,000 रुपए और दूसरा 5,000 रुपए की कटौती का दावा कर सकताहै। 

आज के दौर में चिकित्सा और अस्पताल का खर्च काफी महंगा हो गयाहै विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए इसका भार सहना काफी मुश्किलहोता है। ऐसे में करदाता मेडिक्लेम के जरिए अपने परिवार के लिएस्वास्थ्य बीमा लेकर सुरक्षा के साथ ही धारा 80 डी के तहत कर लाभले सकते हैं।

Source : ET Hindi