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Wednesday, February 4, 2009

Save Tax Without any Investment : बिना इनवेस्टमेंट कैसे बचाएं टैक्स

फिलहाल टैक्स बचाने की योजनाओं का सीजन है। इन दिनों ज्यादातर लोग अंतिम क्षणों में निवेश के कुछ विकल्पों में पैसा डालकर टैक्स बचाने की जुगत में लगे हैं। लेकिन कुछ लोगों के लिए ऑप्शन का चुनाव कोई परेशानी नहीं है। उनके लिए टैक्स के बारे में चिंतित होने से ज्यादा बड़ी चुनौती है कर बचाने वाले प्रोडक्ट के लिए पैसे का जुगाड़ करना।


अगर आप भी ऐसे लोगों की फेहरिस्त में हैं तो कुछ मदद यहां से ले सकते हैं। मौजूदा कारोबारी साल के दौरान आपने जो खर्चे किए हैं, आपको उन पर भी टैक्स छूट मिल सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि आपको पूरे एक लाख रुपए बचाने के लिए निवेश करना पड़े।

 

ट्यूशन फीस से बचाइए टैक्स

स्कूल फीस एक ऐसा खर्च है, जिसे आय कर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत छूट के दायरे में रखा गया है। हालांकि, कर बचाने के नजरिए से स्कूल फीस, ट्यूशन फीस तक सीमित है। मसलन, हो सकता है कि आप बच्चे की स्कूल फीस के तौर पर 50,000 रुपए चुकाते हों लेकिन उसमें केवल 25,000 रुपए ही ट्यूशन फीस हो।


ऐसे मामले में आय कर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत केवल 25,000 रुपए पर ही टैक्स बचेगा। अभिभावकों के लिए अच्छी खबर यह है कि ऐसी कर छूट दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर मिल सकती है और ऊपरी लिमिट 1 लाख रुपए तक है, जो पहले केवल 24,000 तक सीमित थी।

 

मेडिकल खर्च पर टैक्स सेविंग

हर कर्मचारी 15,000 रुपए सालाना मेडिकल रिम्बर्समेंट के तौर पर लेने का हकदार है और इस तरह यह रकम कर के दायरे में नहीं आती। इसके अलावा यह मंजूरी मेडिकल इंश्योरेंस स्कीम के तहत हॉस्पिटलाइजेशन सुविधा से अलग है। इसलिए टैक्स प्लानिंग के इन अंतिम दिनों में आपको अप्रैल 2008 के बाद के मेडिकल बिल खोज निकालने हैं और उन्हें अपनी कंपनी को सौंपना है।


ऐसा करने पर आपकी कर देनदारी बढ़ जाएगी क्योंकि नियोक्ता इस रकम को एलाउंस के तौर पर देगा। एक तरफ, अगर आपने पहले ही यह खर्च किया है तो यह कंपनी से रकम हासिल करने का जरिया होगा और साथ ही टैक्स बचाने में भी काम आएगा।

 

टैक्स सेविंग: लीव ट्रैवल एक्सपेंडिचर

मौजूदा कारोबारी साल में सैर-सपाटा भले ही आपके बैंक बैलेंस को कुछ कम कर दे, लेकिन साथ ही आपकी कर चुकाने से जुड़ी कुछ चिंता भी दूर कर देगी। इन पर होने वाला खर्च लीव ट्रैवल एलाउंस (एलटीए) के तहत आएगा और दो साल में एक बार या चार साल के ब्लॉक में दो बार आप इसका फायदा उठा सकते हैं।


इसलिए अगर आप पिछले साल सालाना घूमने का ब्योरा मुहैया कराना भूल गए थे तो मौजूदा साल में ऐसा कीजिए और टैक्स बचाइए। निश्चित रूप से ऐसे खर्च के लिए आपको नियोक्ता कंपनी को वास्तविक बिल सौंपने होंगे।


इन खर्च से आप बिना नया निवेश किए कुछ टैक्स बचाने में कामयाब हो सकते हैं लेकिन साल चतुराई दिखाइए और अपनी आमदनी की योजना बेहतर तरीके से तैयार कीजिए। मसलन, अपनी एलटीए पर निगाह रखिए और नियमित अंतराल पर मेडिकल बिल क्लेम कीजिए ताकि वित्त वर्ष के अंतिम दिनों में आपको कर बचाने की मुश्किलों से जूझना पड़े।

Monday, January 26, 2009

Tips for Saving Tax : टैक्स बचाने के तरीके

कर चुकाने से बचा नहीं जा सकता है और इसका  भुगतान करना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। क्यों न नए साल पर हम उपलब्ध कर छूट की जानकारी बटोरने के लिए मेहनत करने और उनका फायदा उठाने का प्रण लें। इस तरह आप मेहनत की गाढ़ी कमाई बचा सकते हैं और अतिरिक्त कर का भुगतान करने से बच सकते हैं। हर व्यक्ति कर छूट क्लेम करना चाहता है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि कर चुकाते वक्त पैसा बचाना सभी की वित्तीय प्राथमिकताओं की सूची में शीर्ष पर होता है। लेकिन आय कर कानून की जटिलताओं पर गौर करने के बाद कितने ऐसे लोग होंगे जो इन छूट के बारे में वास्तव में जानकारी रखते हों या उनका पूरा फायदा उठाते हों। निश्चित रूप से आप इनमें से कुछ को नजरअंदाज कर बैठे हों। आइए, कर छूट का फायदा देने वाले ऐसे कुछ बिंदुओं पर गौर करें जिन्हें आम तौर पर नजरअंदाज किया जाता है...

 

होम स्वीट होम

आपका मकान केवल सिर ढकने के लिए छत ही नहीं देता बल्कि कर से बचने का रास्ता भी मुहैया कराता है। अगर आप किराए के अपार्टमेंट में रहते हैं और वेतनभोगी हैं तो हाउस रेंट एलाउंस क्लेम कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो आप कुल आमदनी के 10 फीसदी से ज्यादा बतौर किराए चुकाने पर कर छूट क्लेम कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में कुछ शर्तें होती हैं। अगर आप अपने मकान में रहते हैं तो किसी भी वित्तीय संस्थान से मिलने वाले लोन पर चुकाए गए ब्याज पर कर छूट ले सकते हैं। कई लोग इस रकम को केवल 150000 रुपए तक सीमित मान लेते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसा प्रॉपटीर् के निजी इस्तेमाल के मामले में होता है और जहां मामला प्रॉपर्टी किराए पर देने की बात होती है, उसमें ऐसा नहीं होता।

 

परोपकार का टैक्स बचत में फायदा

दान पर भी कर छूट मिलती है। अगर हम उन्हें चेक के माध्यम ये भुगतान करते हैं तो ज्यादा लंबे वक्त तक याद रखते हैं लेकिन अगर नकद दान देते हैं तो कुछ ही वक्त में भुला बैठते हैं। यह जरूरी है कि धर्मार्थ दान देते वक्त अपनी भी मदद की जाए। कहा भी जाता है कि चैरिटी सबसे पहले घर से शुरू होती है। हमें सिर्फ इतना करना है कि कर छूट के तहत आने वाले दान में दिए गए पैसे की रसीद भर चाहिए। और हमें वह जगह नहीं भूलनी चाहिए जहां ऐसी रसीद रखी जाती हैं।

 

एजुकेशन लोन पर टैक्स छूट

आज कर शिक्षा का खर्च आसमान छू रहा है जिससे वित्तीय बोझ भी बढ़ रहा है। इस सिलसिले में आप अपने पुत्र या पत्नी की उच्च शिक्षा के लिए लोन ले सकते हैं और ऐसे लोन पर दिया जाने वाला ब्याज का भुगतान आपको कर छूट उपलब्ध कराएगा।

 

सेहत ही धन है

मेडिकल इंश्योरेंस पर भी कर छूट मिलती है। हालांकि यह 15000 रुपए जैसी छोटी रकम पर मिलती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। मां-बाप के लिए मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर 15000 रुपए की अतिरिक्त छूट मिलती है। इसके अलावा अगर आपने किसी ऐसे व्यक्ति के मेडिकल खर्च का बोझ उठाया है, जो आप पर निर्भर है तो आपको 40000 से लेकर 75000 रुपए तक की रकम पर छूट मिल सकती है।

 

दूसरे टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स

जीवन बीमा प्रीमियम, डेफर्ड एन्युटी, प्रॉविडेंट फंड में जमा पैसे, ट्यूशन फीस, हाउस लोन कर छूट के एक लाख रुपए के दायरे में आते हैं।

 

Have to pay tax on Income from Rent : किराए की आमदनी पर भी देना होता है टैक्स

रमेश को हर महीने 7,000 रुपए की आमदनी किराए से होती है। वेतन और अन्य स्रोतों से उनकी कर योग्य सालाना  आय 10 लाख रुपए है। रमेश को किराए की आमदनी पर कितना टैक्स देना होगा? क्या उन्हें इस पर कोई कर छूट मिलेगी

 

प्रॉपटी के दाम कुछ साल पहले काफी कम थे। उस समय बहुत से ऐसे लोगों ने निवेश के लिए दूसरा घर खरीदा था। इनके पास रहने के लिए पहले से प्रॉपर्टी थी। दूसरे घर को अक्सर लोग किराए पर दे देते हैं क्योंकि यह आमदनी का जरिया बन जाता है। अगर किसी व्यक्ति के पास एक घर है और उसमें वह खुद रहता है तो उसे इस पर कोई कर नहीं देना होता। लेकिन दूसरी प्रॉपर्टी के बारे में क्या नियम हैं

 

अगर दूसरी प्रॉपर्टी से किराए के तौर पर कोई आमदनी नहीं हो रही है तो उस पर मामूली/ अनुमानित किराए के अनुसार कर देना होता है। यह अनुमानित किराया बहुत सी बातों पर निर्भर होता है, जिसमें घर की कीमत, लोकेशन, सुविधाएं, उस जगह पर किराए की मौजूदा दरें शामिल होती हैं। वार्षिक मूल्य आय अर्जित करने की प्रॉपर्टी की क्षमता होती है। यह प्रॉपर्टी के मालिक को मिलने वाले वास्तविक किराए से भी ज्यादा हो सकती है। 

 

किराए से हासिल आमदनी पर कर बाध्यता 

इस आय को कर योग्य आमदनी में जोड़ दिया जाता है और कर बाध्यता कर के स्लैब के आधार पर होती है। किराए से मिलने वाली आमदनी का 30 फीसदी तक प्रॉपर्टी के रखरखाव और संपत्ति कर जैसे खर्च के भुगतान के लिए घटाया जा सकता है। 

 

अगर किराए पर दी गई प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए होम लोन लिया गया है तो मासिक किस्त (ईएमआई) के भुगतान पर पूरा ब्याज आयकर कानून की धारा 24 के तहत आमदनी में से घटा दिया जाता है। इसके लिए 1.5 लाख रुपए सालाना तक की कोई सीमा नहीं है। अगर करदाता की प्रॉपर्टी खाली है और वह किसी अन्य शहर यह जगह पर नौकरी कर रहा है तो इस प्रॉपर्टी का वार्षिक मूल्य शून्य माना जा सकता है। 

 

किराए से होने वाली आय पर 'इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी' के मद में कर चुकाना होता है। रमेश को अपनी अन्य आय में इस आमदनी को जोड़ने के बाद कर बाध्यता की गणना करनी चाहिए। वह चाहें तो रखरखाव और अन्य खर्चों के लिए किराए की आमदनी में से 30 फीसदी रकम घटा सकते हैं।

 

 

Incom Tax Planning : इनकम टैक्स प्लानिंग

अपनी याददाश्त पर जोर डालकर जरा सोचिए कि आपने  कभी कोई ऐसा व्यक्ति देखा है, जिसने अपनी आयकर देनदारी को देखने के बाद लंबी सांस न ली हो। दूसरी ओर आपको ऐसे बहुत से लोग याद आ जाएंगे, जो मार्च से पहले आयकर बचाने के लिए निवेश को लेकर भाग-दौड़ करते हैं या कोई ऐसा सहकर्मी जो आयकर कानून की धारा 80सी के तहत एक लाख रुपए की पूरी कर छूट का लाभ उठाने के लिए बाकी बचे 30,000 रुपए के निवेश के लिए किसी बीमा पॉलिसी की तलाश में है।


इसमें कोई शक नहीं है कि कर योजना महत्वपूर्ण काम है लेकिन अधिकांश लोगों का नजरिया इसे लेकर लापरवाही का होता है। उनका प्रयास मौजूदा जरूरत को पूरा करने के लिए तुरंत कोई उपाय खोजने का होता है। ज्यादातर लोग इसे एक ऐसी जरूरत के तौर पर देखते हैं, जिसे पूरा करना आवश्यक होता है लेकिन इसका उनके वित्तीय से जुड़े लक्ष्यों या वित्तीय योजनाओं से कोई संबंध नहीं होता। फाइनेंशियल प्लानरों का कहना है कि कर योजना को वित्तीय योजना का अहम हिस्सा मानना चाहिए।


कर लाभ का वादा करने वाला कोई भी इंस्ट्रूमेंट खरीदने के बजाए, उन्हें ऐसा निवेश चुनना चाहिए जो कर लाभ के साथ ही लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न भी उपलब्ध कराए। निवेशकों के लिए ऐसे बहुत से इंस्ट्रूमेंट उपलब्ध हैं, जो इस दोहरी जरूरत को पूरा करते हैं। लेकिन इनमें निवेश से पहले आपको अपने मौजूदा पोर्टफोलियो पर नजर डालकर यह देखना होगा कि कितनी कटौती के लिए आप पहले से योग्य हैं और कितना अंतर आपको पूरा करना है। ईटी कर बचत योजना को लेकर कुछ फायदेमंद निवेश के विकल्पों की यहां जानकारी दे रहा है।

 

अगर आप इक्विटी में निवेश चाहते हैं, लेकिन खुद से कोई जोखिम नहीं उठाने की इच्छा रखते तो कर बचाने वाले फंड इसका एक अच्छा जरिया हैं। इनमें निवेश से आपको धारा 80सी के तहत एक लाख रुपए तक की कटौती का लाभ मिलता है। हालांकि, इन फंड में आमतौर पर तीन वर्ष की लॉक-इन अवधि होती है और इसी वजह से इनमें वह रकम लगाने की सलाह दी जाती है जिसकी आपको कम से कम अगले तीन वर्ष के लिए आवश्यकता नहीं है।

 

अगर आप जोखिम से बचने वाले व्यक्ति हैं और अपना पैसा बैंक से नहीं निकालना चाहते तो आप कर बचाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस समय केवल पांच वर्ष के फिक्स्ड डिपॉजिट (क लाख रुपए) पर ही कर लाभ की पेशकश है। मौजूदा ब्याज दरें आम निवेशक के लिए लगभग 8.25 फीसदी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 8.75 फीसदी हैं। ये दरें हालांकि बाजार में उपलब्ध अन्य फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले कम हो सकती हैं लेकिन एफडी पर मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम इस समय कर मुक्त है।


फाइनेंशियल प्लानर वीर सरदेसाई का कहना है कि अगर आपको एफडी और ईएलएसएस में से किसी एक का चुनाव करना है तो इसके लिए कर योजना को संपत्ति बढ़ाने के लक्ष्य के साथ देखना चाहिए। अगर आप रिटर्न के लिहाज से देखें तो ईएलएसएस में एफडी से बेहतर लाभ मिलने की संभावना होती है। अगर कोई व्यक्ति एफडी में निवेश को ही पसंद करता है तो उसके लिए सरदेसाई की सलाह है कि मौजूदा दौर में इस विकल्प में वही रकम लगाना सही रहेगा, जो आपने आपात जरूरतों के लिए अलग रखी है।

 

आईट्रस्ट फाइनेंशियल एडवाइजर्स के सह-संस्थापक, कार्तिक वर्मा के अनुसार, 'कर चुकाने के बाद रिटर्न बढ़ाने के लिए 35-45 आयु वर्ग में आने वाले बहुत से लोग हर साल बीमा पॉलिसी लेते हैं, लेकिन इनमें से बहुत सी पॉलिसी की उन्हें जरूरत नहीं होती।' विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर आप बीमा पर विचार कर रहे हैं तो आपको ऐसी योजना में निवेश करना चाहिए, जो न केवल बीमा सुरक्षा दे बल्कि निवेश का मौका भी उपलब्ध कराए। इनमें यूलिप जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं।


अर्न्स्ट एंड यंग के टैक्स पार्टनर कि अमिताभ सिंह भी इससे सहमत हैं। उनका कहना है, 'जीवन बीमा पॉलिसियों से मिलने वाला भुगतान कर मुक्त होता है। इसे देखते हुए किसी बीमा पॉलिसी से 10 फीसदी का रिटर्न भी अच्छा माना जाएगा।

 

होम लोन और एजुकेशन लोन पर कर कटौती उपलब्ध है। ज्यादातर लोन की अवधि 10-20 वर्ष की होती है और बहुत से लोग ऐसा मानते हैं कि लोन की अदायगी के अवधि लंबी होने पर वह ज्यादा समय तक कर लाभ ले सकते हैं। अमिताभ का कहना है कि धारा 80 सी के तहत कर कटौती केवल मूल धन की अदायगी पर उपलब्ध है।


ब्याज के हिस्से पर कर कटौती धारा 24 के तहत आती है और यह इस बात पर निर्भर करती है कि घर किराए पर दिया गया है या आप इसमें स्वयं रह रहे हैं। लंबी अवधि के लोन में ब्याज का हिस्सा काफी अधिक होता है और अगर ब्याज पर मिलने वाली कर कटौती से आप अधिक ब्याज का भुगतान कर रहे हैं तो इस विकल्प पर दोबारा विचार करें। अगर आप एजुकेशन लोन लेते हैं तो इसके ब्याज पर कर कटौती का फायदा मिल सकता है।

 

जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए कुछ ऐसी छोटी बचत योजनाएं मौजूद हैं जिनमें निश्चित रिटर्न के साथ ही कर लाभ भी मिलता है। उदाहरण के तौर पर 15 वर्ष के पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) में वार्षिक योगदान पर आपको 8 फीसदी का ब्याज (यह बदल सकता है) मिलता है लेकिन इसमें आप एक वर्ष में 70,000 रुपए तक की जमा राशि पर ही धारा 80सी के तहत कर लाभ ले सकते हैं। ब्याज से मिलने वाली आमदनी आयकर कानून की धारा10 (11) के तहत कर मुक्त होती है।


इसके साथ ही कुछ अन्य विकल्पों में भी आप निवेश कर सकते हैं। इनमें राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी), पांच वर्ष की डाकघर जमा योजना या वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत योजना भी शामिल है। यह योजना उन लोगों के लिए ही है, जो 60 वर्ष से अधिक की आयु के हैं या जिन्होंने 55 वर्ष की उम्र में स्वैच्छिक सेवानिवृति ली है। खुद के लिए या माता-पिता के लिए ली गई मेडिक्लेम पॉलिसी पर भी आप धारा 80डी के तहत अधिकतम 35,000 रुपए की कर कटौती ले सकते हैं।

 

35 वर्षीय महेश भटनागर धारा 80 के तहत कर लाभ लेने के लिए पांच वर्ष से प्रतिवर्ष एक लाख रुपए ईएलएसएस में निवेश कर रहे हैं। उनके निवेश का बाजार मूल्य आज 3.5 लाख रुपए है। ईएलएसएस फंड में 3 वर्ष की लॉक-इन अवधि होने की वजह से इसमें से केवल 2.5 लाख रुपए ही वह भुना सकते हैं। महेश अब 30 लाख रुपए का एक घर खरीदने की योजना बना रहे हैं। वह 24 लाख रुपए का लोन ले सकते हैं लेकिन बाकी की रकम के लिए उनके पास केवल मौजूदा निवेश ही उपलब्ध है।

 

5 वर्ष तक 5 लाख रुपए का निवेश करने के बावजूद वह 6 लाख रुपए जुटाने में असमर्थ हैं।


रास्ता


पहले दो वर्ष में वह संपत्ति के सही आवंटन और धारा 80 सी के तहत अधिकतम लाभ लेने के लिए इक्विटी और एनएससी में निवेश कर सकते थे। बाद के वर्षों में वह 80 सी के तहत बीमा, प्रॉविडेंट फंड में योगदान और अपनी बेटी की स्कूल फीस पर कर कटौती के जरिए कर बचा सकते थे।

कैसे उठाएं टैक्स छूट का फायदा

कर चुकाने से बचा नहीं जा सकता है और इसका भुगतान करना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। क्यों न नए साल पर हम उपलब्ध कर छूट की जानकारी बटोरने के लिए मेहनत करने और उनका फायदा उठाने का प्रण लें। 

इस तरह आप मेहनत की गाढ़ी कमाई बचा सकते हैं और अतिरिक्त कर का भुगतान करने से बच सकते हैं। हर व्यक्ति कर छूट क्लेम करना चाहता है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि कर चुकाते वक्त पैसा बचाना सभी की वित्तीय प्राथमिकताओं की सूची में शीर्ष पर होता है। लेकिन आय कर कानून की जटिलताओं पर गौर करने के बाद कितने ऐसे लोग होंगे जो इन छूट के बारे में वास्तव में जानकारी रखते हों या उनका पूरा फायदा उठाते हों। निश्चित रूप से आप इनमें से कुछ को नजरअंदाज कर बैठे हों। 

आइए, कर छूट का फायदा देने वाले ऐसे कुछ बिंदुओं पर गौर करें जिन्हें आम तौर पर नजरअंदाज किया जाता है- 

होम स्वीट होम 

आपका मकान केवल सिर ढकने के लिए छत ही नहीं देता बल्कि कर से बचने का रास्ता भी मुहैया कराता है। अगर आप किराए के अपार्टमेंट में रहते हैं और वेतनभोगी हैं तो हाउस रेंट एलाउंस क्लेम कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो आप कुल आमदनी के 10 फीसदी से ज्यादा बतौर किराए चुकाने पर कर छूट क्लेम कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में कुछ शर्तें होती हैं। अगर आप अपने मकान में रहते हैं तो किसी भी वित्तीय संस्थान से मिलने वाले लोन पर चुकाए गए ब्याज पर कर छूट ले सकते हैं। कई लोग इस रकम को केवल 150000 रुपए तक सीमित मान लेते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसा प्रॉपटीर् के निजी इस्तेमाल के मामले में होता है और जहां मामला प्रॉपर्टी किराए पर देने की बात होती है, उसमें ऐसा नहीं होता। 

परोपकार का फायदा 

दान पर भी कर छूट मिलती है। अगर हम उन्हें चेक के माध्यम ये भुगतान करते हैं तो ज्यादा लंबे वक्त तक याद रखते हैं लेकिन अगर नकद दान देते हैं तो कुछ ही वक्त में भुला बैठते हैं। यह जरूरी है कि धर्मार्थ दान देते वक्त अपनी भी मदद की जाए। कहा भी जाता है कि चैरिटी सबसे पहले घर से शुरू होती है। हमें सिर्फ इतना करना है कि कर छूट के तहत आने वाले दान में दिए गए पैसे की रसीद भर चाहिए। और हमें वह जगह नहीं भूलनी चाहिए जहां ऐसी रसीद रखी जाती हैं। 

शिक्षा 

आज कर शिक्षा का खर्च आसमान छू रहा है जिससे वित्तीय बोझ भी बढ़ रहा है। इस सिलसिले में आप अपने पुत्र या पत्नी की उच्च शिक्षा के लिए लोन ले सकते हैं और ऐसे लोन पर दिया जाने वाला ब्याज का भुगतान आपको कर छूट उपलब्ध कराएगा। 

सेहत ही धन है 

मेडिकल इंश्योरेंस पर भी कर छूट मिलती है। हालांकि यह 15000 रुपए जैसी छोटी रकम पर मिलती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। मां-बाप के लिए मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर 15000 रुपए की अतिरिक्त छूट मिलती है। इसके अलावा अगर आपने किसी ऐसे व्यक्ति के मेडिकल खर्च का बोझ उठाया है, जो आप पर निर्भर है तो आपको 40000 से लेकर 75000 रुपए तक की रकम पर छूट मिल सकती है। 

दूसरे बिंदू 

जीवन बीमा प्रीमियम, डेफर्ड एन्युटी, प्रॉविडेंट फंड में जमा पैसे, ट्यूशन फीस, हाउस लोन कर छूट के एक लाख रुपए के दायरे में आते हैं।

Tax Rebate on HRA : एचआरए पर मौजूद है टैक्स लाभ

आयकर कानून में मकान किराया भत्ता (एचआरए) के लिए कटौती की अनुमति दी जाती है। अधिकतर कंपनियां अपने कर्मचारियों को किराए पर मकान लेने के खर्च की भरपाई के लिए एचआरए का भुगतान करती हैं। यह वेतन का एक हिस्सा होता है। 

एचआरए पर कर छूट आयकर कानून की धारा 10 (13ए) और आयकर नियमों की नियम संख्या २ए के तहत मिलती है। यह याद रखना जरूरी है कि एचआरए की पूरी राशि की कटौती नहीं होती। यह एक भत्ता है और इसके लिए आयकर देना होता है। एक कर्मचारी तभी छूट का दावा कर सकता है, जब वह किराए के मकान में रहता है। 

कटौती के लिए कर्मचारी को मकान के किराए का वास्तविक भुगतान करना होता है। अगर वह अपने घर में रहता है तो उसे कोई टैक्स छूट नहीं मिलती और पूरी राशि पर आयकर चुकाना होता है। अगर मकान के किराए का कर्मचारी भुगतान नहीं करता तो उसे कटौती नहीं मिलेगी। 

आयकर कानून के मुताबिक एचआरए पर छूट इनमें से सबसे कम राशि पर मिलती है: 

कर्मचारी को उस अवधि के लिए मिली वास्तविक एचआरए राशि जिसमें वह पिछले वित्त वर्ष में किराए के मकान में रहा था। 

वह राशि जो कर्मचारी ने घर के किराए पर खर्च की हो और जो संबंधित अवधि में उसके वेतन के दसवें हिस्से से अधिक हो। 

अगर घर मुंबई, कोलकाता या दिल्ली में हैं तो संबंधित अवधि में वेतन का 50 फीसदी। अन्य शहरों के लिए यह वेतन का 40 फीसदी है। 

वेतन में मूल वेतन के साथ ही निम्न भी शामिल होते हैं: 

महंगाई भत्ता, अगर उसे नौकरी की शर्तों के अनुसार मिलता है। 

कर्मचारी ने जो टर्नओवर का निश्चित फीसदी हासिल किया है, उस पर कमीशन। 

कर कटौती उसी अवधि के लिए मिलेगी जिसमें कर्मचारी किराए के मकान में रहा हो। इसके बाद ही अवधि के लिए यह उपलब्ध नहीं होगी।

Pension Plan : पेंशन प्लान के लिए भविष्य की जरूरतों का अनुमान जरूरी

पिछले कुछ समय से वित्तीय बाजारों पर अनिश्चितता केबादल घिरने की वजह से दौराननिवेशकों के बीच रिटायरमेंट कीयोजना तैयार करने की जरूरतको तरजीह दी जाने लगी है।हाई वोल्टेज मार्केटिंगरणनीतियों ने कई तरह से इसमें भूमिका अदा की है लेकिन जीवनकालबढ़ने और नौकरी एवं कॅरियर के मोर्चे पर लगातार बढ़ती अनिश्चिय कीस्थिति की वजह से लोग पेंशन प्लान के बारे में सोचने पर मजबूर हो गए हैं।

 

इसके फलस्वरूप पेंशन प्लान निवेश पर अब केवल कर छूट का फायदाउठाने के लिए गौर नहीं किया जाता बल्कि लोग संजीदा होकर पेंशन सेहोने वाली आमदनी के बारे में सोचने लगे हैं। वेतनभोगी लोगों के पासरिटायर होने के बाद ग्रेच्युटी और पेंशन इनकम का सहारा होता हैलेकिन जो व्यक्ति स्वरोजगार में लगे लोगों के पास केवल पेंशन प्लानका ही सहारा होता है। इससे रिटायरमेंट की बाद की जिंदगी के लिएउनके पास नियमित आय का स्रोत बरकरार रहता है।

 

हालांकि पेंशन प्लान निवेशकों के दोनो समूहों के लिए फायदेमंद हैक्योंकि यह सामान्य निवेश उत्पाद है जिसमें बहुत कम प्रबंधन कीजरूरत पड़ती है। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि यह उत्पाद कामकैसे करता है तो जरा इस ब्योरे पर नजर डालिए :

 

पेंशन प्लान बीमा कंपनियां मुहैया कराती हैं और कुछ म्यूचुअल फंडइसकी पेशकश करते हैं। पेंशन रोजगार से सेवानिवृत्ति के बाद मिलती हैलेकिन निवेशक अपने मन - मुताबिक अवधि तय कर सकता है। मसलन, 50 वर्षीय एक पेशेवर 10 साल की टर्म के लिए पेंशन प्लानले सकता है लेकिन अगर उसे लगता है कि उसे फिलहाल पेंशन सेमिलने वाले पैसे की जरूरत नहीं है तो वह यह अवधि पांच और साल के लिए बढ़ा सकता है।

 

सौभाग्य से आप ऐसा फैसला पेंशन प्लान लेते वक्त ही नहीं बल्कि 60के करीब पहुंचने पर भी कर सकते हैं। इसलिए , युवा निवेशकों के पासपेंशन के लिए ज्यादा रकम एकत्र करने का विकल्प होता है जबकि जोइस बारे में देर से सोचते हैं, उनके हाथ में कम वक्त होता है।

 

कई लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती पेंशन प्लान के लिए प्रीमियम तयकरना होता है। तकनीकी रूप से, पेंशन फंड को रिटायरमेंट कीबाद की जिंदगी के लिए पैसे काइंतजाम सुनिश्चित करनाचाहिए। हालांकि , जीवन केशुरुआती चरण में आंकड़ें तयकरना इतना आसान नहीं होताक्योंकि थोड़े वक्त में ही हमारीजरूरतों और जीवनशैली मेंगजब का बदलाव आ जाता है।

 

इसलिए , दिमाग में यह बात रखना जरूरी है कि एक पेंशन प्लान सेशायद आपकी जरूरतें पूरी न हों और आपको ऐसी एक और स्कीमलेनी पड़े। एक से ज्यादा पेंशन प्लान का विकल्प है पति और पत्नी केलिए अलग - अलग पेंशन प्लान जो लंबी अवधि में कर छूट का फायदा भी मुहैया कराता है।

 

सेवानिवृत्ति के बाद कितनी पेंशन की जरूरत होगी , इसका अंदाजा लगाने का सबसे आसान तरीका मौजूदा जरूरतों के आधार पर रकम कापता लगाना है। मासिक खर्च का ब्यौरा तैयार करते वक्त बच्चे की शिक्षाजैसे व्यय को इसके दायरे से बाहर ही रखिए क्योंकि रिटायरमेंट के बादऐसा खर्च आपको नहीं चुकाना होगा।

 

पेंशन को भविष्य की वैल्यू के आधार पर मासिक खर्च के कम से कम 50 फीसदी हिस्से का ख्याल रखना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर किसी 35 वर्षीय निवेशक का मासिक खर्च 50,000 रुपए है तो उसे इसरकम की भावी वैल्यू तक पहुंचना चाहिए और फिर पेंशन की रकम परगौर करना चाहिए। रिटायरमेंट या पेंशन की रकम का आकलन करते वक्त लिक्विड फंडऔर सावधि जमा जैसे वित्तीयसंपत्तियों पर गौर करना चाहिए।

 

प्रॉपर्टी और किराए से होने वालीआमदनी पर भी विचार करनाचाहिए। हालांकि निवेशकों कोखर्च का अंदाजा लगाते वक्तमहंगाई दर के मामले में खुलारुख दिखाना चाहिए और इसकाआकलन कम से कम 8-9 फीसदी की दर से किया जाना चाहिए।

 

थोक मुद्रास्फीति दर औसतन पांच फीसदी के आसपास रहती है लेकिनजब बात स्वास्थ्य सेवा जैसे खर्च की आती है तो यह काफी ज्यादाहोता है। पेंशन प्लान का प्रीमियम आपकी उम्र और पेंशन की रकम परनिर्भर करता है। अगर कम उम्र में आप इसमें निवेश करते हैं तो कमप्रीमियम पर अधिक पेंशन का लाभ उठा सकते हैं। उम्र बढ़ने परप्रीमियम की रकम भी बढ़ जाती है।

 

पेंशन की शुरुआत का समय आप स्वयं तय कर सकते हैं। अगर आपप्राइवेट सेक्टर में नौकरी करते हैं जहां पेंशन की सुविधा नहीं है तोअपने जीवन के सुनहरी वर्षों में वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिएआप पेंशन प्लान में निवेश कर सकते हैं।


Source: ET Hindi

Save Tax on Medical Insurance : मेडिकल इंश्योरेंस पर ले सकते हैं टैक्स का लाभ

सालाना आमदनी पर कर बचाने के लिए एक लाख रुपए की बचत की सीमा के बारे में सभी जानते हैं।लेकिन बहुत कम लोगों को इसबात की जानकारी है कि करबचाने के लिए आयकर कानूनकी धारा 80 डी का भी इस्तेमालकिया जा सकता है। 

विकास ने अपने पूरे परिवार केलिए मेडिकल इंश्योरेंस ली है।वह प्रतिवर्ष खुद के लिए 9,000 रुपए और अपनी पत्नी के लिए 8,000रुपए प्रीमियम का भुगतान करते हैं। इसके अलावा वह अपने पिता केलिए 7,000 रुपए और चाचा के स्वास्थ्य बीमा के लिए 6,000 रुपएसालाना का प्रीमियम भरते हैं। क्या वह इस पर कर कटौती का लाभ लेसकते हैं 

मेडिकल इंश्योरेंस आप खुद के साथ साथ अपने परिवार के लिए भीले सकते हैं और धारा 80 डी के तहत प्रीमियम की राशि आय में सेकटौती के योग्य होती है। यह कटौती प्रीमियम की राशि या 15,000रुपए जो भी कम हो के लिए मिलती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यहप्रीमियम की राशि या 20,000 रुपए जो भी कम हो है। कटौती उसीस्थिति में उपलब्ध होती है जब प्रीमियम का भुगतान चेक या क्रेडिटकार्ड के जरिए किया जाए। नकद भुगतान पर यह लाभ नहीं मिलता। 

करदाता खुद के लिए पति या पत्नी के लिए आश्रित माता पिता याआश्रित बच्चों के लिए ली जाने वाली मेडिकल इंश्योरेंस पर ही कर लाभले सकता है। इसके लिए भी जरूरी है कि उस मेडिकल इंश्योरेंस स्कीमको जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन या बीमा नियामक एवं विकासप्राधिकरण इरडा से मंजूरी प्राप्त हो। अगर आप अपने परिवार के साथही 65 वर्ष से अधिक आयु वाले माता पिता के लिए इंश्योरेंस लेते हैंतो आप इस पर 35,000 रुपए तक की कर कटौती ले सकते हैं। 
विकास के मामले में कर कटौती इस प्रकार होगी 

खुद के बीमा के लिए प्रीमियम का भुगतान 000 रुपए 

पत्नी के लिए प्रीमियम का भुगतान 000 रुपए 

कुल प्रीमियम 000 रुपए जमा 8,000 रुपए ): 17 000 रुपए। 

नियम के अनुसार विकास बीमा के प्रीमियम की राशि या 15,000 रुपएमें से जो भी कम राशि हो उस पर कर कटौती ले सकते हैं। विकासके लिए यह राशि 15,000 रुपए की होगी। विकास अपने पिता कीमेडिकल इंश्योरेंस के लिए 7,000 रुपए के प्रीमियम पर भी कर कटौतीका लाभ ले सकते हैं। इस तरह उनकी कुल कटौती 15 000 रुपएजमा 7,000 रुपए 22 000 रुपए की होगी। विकास ने अपने चाचा केबीमा के लिए जिस प्रीमियम का भुगतान किया है उस पर उन्हें कोईकर लाभ नहीं मिलेगा। 

अगर पति और पत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं तो वे हेल्थ इंश्योरेंस के वार्षिकप्रीमियम पर अलग अलग 15,000 रुपए तक की कर कटौती ले सकतेहैं। अगर दोनों मिलकर 20,000 रुपए का प्रीमियम भरते हैं तो उनमें सेएक 15,000 रुपए और दूसरा 5,000 रुपए की कटौती का दावा कर सकताहै। 

आज के दौर में चिकित्सा और अस्पताल का खर्च काफी महंगा हो गयाहै विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए इसका भार सहना काफी मुश्किलहोता है। ऐसे में करदाता मेडिक्लेम के जरिए अपने परिवार के लिएस्वास्थ्य बीमा लेकर सुरक्षा के साथ ही धारा 80 डी के तहत कर लाभले सकते हैं।

Source : ET Hindi