Wednesday, February 4, 2009

Do you opened a Junior Account for your Child : जूनियर का एकाउंट बनाया?

अगर आप उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने 18 साल पूरे करने के बाद कॉलेज के लिए घर से बाहर कदम रखते वक्त बैंक खाता शुरू किया था और अपनी प्रतिष्ठा बचाना चाहते हैं तो अपने से कम उम्र के बच्चे को यह जानकारी ही दीजिए। ऐसा करने पर आपको बच्चे के अजीबोगरीब हाव-भाव का सामना करना पड़ेगा, जो आप पर तंज कसते हुए बताएगा कि वह 10 साल की उम्र में ही बैंकिंग से रूबरू हो गया था। तो क्या करना चाहिए आपको?

 

क्यों जरुरी है किड-एकाउंट?

इन दिनों बच्चे जल्दी बड़े हो रहे हैं। वे अपना बैंक खाता चाहते हैं, पैसा निकालने के लिए एटीएम कार्ड इस्तेमाल करना चाहते हैं और शॉपिंग करते वक्त खुद डेबिट कार्ड का उपयोग करना चाहते हैं। भारत में ज्यादातर बैंक बच्चे के नाम पर बचत खाता शुरू करने की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। आइए हम आपको इस बारे में इंफॉरमेंशन दें कि ऐसा कैसे किया जा सकता है और इसके क्या क्या लाभ हैं...

 

जानिए बेसिक बातें

अधिकतर बैंकों में जूनियर एकाउंट 18 साल के बच्चों के लिए उपलब्ध हैं। हालांकि ऐसा खाता शुरू करने के लिए न्यूनतम आयु एक दिन भी हो सकती है। आगे कोई भी जानकारी देने से पहले यह साफ करना बेहतर रहेगा कि भले ही खाता बच्चे के नाम पर हो, लेकिन इसका संचालन माता-पिता या कानूनी रूप से मान्य अभिभावक की अगुवाई में हो सकता है। अभिभावक को नियमित अंतराल पर कुछ रकम इस खाते में डालने को कहा जा सकता है और बच्चे भी अपनी बचत इसी खाते में जमा करा सकते हैं। इस खाते में न्यूनतम राशि रखने को भी कहा जा सकता है और यह बैंक पर निर्भर करता है।

 

फायदे ही फायदे

खाता शुरू करने का उद्देश्य अपने बच्चे के लिए पैसे के स्रोत का इंतजाम करना और उसे अच्छा महसूस कराना ही नहीं है। अनुशासन का बोध कराने की, खास तौर से एटीएम और डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को लेकर। 


एचडीएफसी बैंक में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रीटेल लायबिलिटीज अनिंदया मित्रा ने कहा, ' पॉकेट मनी, तोहफे, स्कॉलरशिप आदि विभिन्न स्रोत से मिलने वाले अतिरिक्त पैसे को बैंक खाते में जमा करने से बच्चे को बचत और बजटिंग की आदत पड़ती है।'

 

पैरेंट्स का कंट्रोल

अभिभावक पैसे और कार्ड के दुरुपयोग को लेकर चिंतित हो, इसमें मदद देने के लिए बैंक बच्चों के खातों पर मां-बाप के नियंत्रण की सहूलियत देते हैं। यह अभिभावक पर निर्भर करता है कि वह एटीएम या डेबिट कार्ड जारी कराना चाहता है या नहीं। साथ ही चेक से भुगतान करते वक्त उस पर अभिभावक के दस्तखत जरूरी होते हैं। ऑनलाइन या फोन बैंकिंग से होने वाली ट्रांजैक्शन के लिए जरूरी पासवर्ड भी अभिभावकों को दिए जाते हैं और उन्हें बच्चों को यह जानकारी नहीं देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। 


आईसीआईसीआई बैंक के वरिष्ठ महाप्रबंधक मनिंदर जुनेजा ने कहा, ' यहां तक कि जब ऐसे कार्ड जारी किए जाते हैं तो भी बैंक अभिभावकों को रकम की वह सीमा तय करने की इजाजत देते हैं जो एटीएम से निकाली जा सकती है या फिर डेबिट कार्ड इस्तेमाल करते वक्त खर्च की जा सकती है।'

 

और क्या हैं लाभ?

बच्चों के खाते पर कुछ बैंक आपको खास सुविधाएं देते हैं। एचडीएफसी किड्स एडवांटेज प्लान सड़क हादसे में अभिभावक की मृत्यु होने की सूरत में करीब एक लाख रुपए का मुफ्त शिक्षा बीमा कवर मुहैया कराता है। इसके अलावा अगर खाते में जमा राशि किसी खास स्तर को पार करती है तो बैंक खुद--खुद उसका कुछ हिस्सा फिक्स्ड या टर्म डिपॉजिट में स्थानांतरित कर देता है। 


कदम-दर-कदम ऐसा खाता शुरू करने के लिए आपको बच्चे के पैदा होने की तारीख की पुष्टि करने वाले दस्तावेज की जरूरत होती है। अभिभावक को बालक की पहचान, पता और बच्चे के साथ अपने रिश्ते साबित करने से जुडे़ कागजात भी जमा कराने होते हैं। रकम के आधार पर ऐसी स्थिति तय की गई है, जब बच्चा अकेले अपना खाता चला सकता है लेकिन उम्र और ट्रांजैक्शन का तरीका बैंक पर निर्भर करता है।

 


No comments: